प्रेम के बिना जीवन अर्पूण होगा , और होते ही गयी भैसं पानी मैं , फिर माथा पकड़ रोना ,यह क्या हो गया । जो उचित लगेगा वही अनुचित सिद्ध होगा । आकस्मिक सेक्स को प्रेम मैं परिभाषित करोगे तो जिंदगी बार के लिए घंटी बन्द जाएगी , न उतारी जाएगी न पहनते ही बनेगी । प्रेम मैं बलिदान देने से , नेशनल अवार्ड नहीं मिलेगा , कुछ समय बाद पछताना जरूर पड़ेगा । एक तरफ़ा रोमांस , कल्पना और यथार्थ मैं फरक समझें । कोई व्यक्ति यदि नहीं आ रहा समझ मैं ,तो जल्दी टाटा बाय बाय करें ।
मशवरा बाबा घंटा जी का– महाराणा प्रताप या रानी लक्ष्मी बाई बन वादों को निभाने के लिए फसें नहीं, मौज लो मौज दो, नहीं समझ मैं आये तो बाबा जी का घंटा

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