कामदेवतों , प्रेम मैं मामले में ज्यादा उतावले हो कर , थ्योरी ही थ्योरी मैं एक तरफ़ा प्रेम कर अपनी दिमाग का बैंड न बजवायें । प्रेम कोई नवीन विश्व का द्वार नहीं की प्रवेश से पहले सोच सोच की ही अधमरे हो जाओ , की घुस ही न पाओ । बड़ी बड़ी बातों से जरूरी नहीं की , हर कोई प्रभावित हो , प्रेम और सेक्स कोई जटिल क्रिया नहीं , की गूढ़ अध्यन की जरूरत पड़े । व्यवहार सुनिश्चित रख, बातें करें, नयी नयी खोजो से प्रेमी आपसे , प्रभवित नहीं बल्कि दूर भागेगा ।
मशवरा बाबा घंटा जी का– थ्योरी , थ्योरी मैं कुछ नहीं रखा , प्रैक्टिकल ज्यादा करो , हरेक चीज़ सो बार सोचके ही हो यह जरूरी नहीं ,क्षणिक पल या मोके का भी अपना सुख है

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