प्यार दो प्यार लो , नहीं मिले तो कहीं और से लो । खुद की शकल जोंनी लीवर सी भी हो , पर चाहिए परीणीति चोपड़ा ही , कम से काम नहीं बनेगा , सेंटर ऑफ़ अट्रैक्शन हो तो मेरा यार , नहीं तो कैसा प्यार , लगे तो सही किसके साथ है ।मालूम सब है पर करना उल्टा ही है , भ्रम तथा वास्तविकता मैं क्या फरक है पहचानो । मैं से हट के दुनिया देखो , जो प्रशंसा करे , वो फ़िराक मैं है , वरना रजिया गुंडों मैं है । नये नये की होड़ मैं बहुत कुछ छूट जायेगा ।

मशवरा बाबा घंटा जी का– लेने देने को फीते से न नपे , पुराने मैं भी आनंद है

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